Qir'at e Khalful Imam
[6/4, 8:18 PM] 🌹MUHAMMAD HASNAIN RAZA🌹: 🌸तर्क किराअत खलफुल इमाम
*💎दुआ का तालिब: मुहम्मद मुद्दस्सिर मुख्तार ख़ाँन महिदपुरी*
📲+919617536950
.. ..... किस्त 2
इमाम अबू हनीफा रहमतुल्लाह अलैही इमाम अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैही इमाम मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैही इमाम सुफियान सूरी रहमतुल्लाह अलैही और इमाम इब्ने एनी रहमतुल्लाह अलैही के यहाँ मुक्तादी के लिए किराअत खलफल इमाम मना और मकरुहै तेहरिमी है खुआ नमाज़ जेहरी हो या सिर्री.. साहिबे हिदाया ने इमाम मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैही का कोल नक़ल किया है के वो सिर्री नमाज़ मे एहतियातन किराअत खलफल इमाम को मुस्ताहसन करार देते है लेकिन ये दुरुस्त नहीं है साहिबे हिदाया को इस सिलसिले मे इसतबह हुआ है नक़ल मे तसमहा हुआ है क्यों की इमाम मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैही खुद अपनी किताब मुअत्ता इमाम मुहम्मद मे अपना और इमाम अबू हनीफा रहमतुल्लाह अलैही का कौल नक़ल करते है
قٙالٙ مُحٙمّٙدُُ لٙا قِرٙاءٙةٙ خٙلْفٙ الْاِمٙامِ فِیْمٙا جُھِرٙ فِیْہِ وٙلٙا فِیْمٙا لٙمْ یُجْھٙرْ بِذٙالِکٙ جٙاءٙتْ عٙامٙةُ الْآثٙارِ وٙھُوٙ قٙوْلُ اٙبِیْ حٙنِیْفٙةٙ .....( موطا امام محمد ص 96 قدیمی کتب خانہ )
तर्जुमा :- हजरत इमाम मुहम्मद ने कहा है की इमाम के पीछे किराअत का हुक्म नहीं है चाहे इमाम जेहरी कर रहा हो या आहिस्ता पढ़ रहा हो आम आसार मे इसी का ज़िक्र है और यही हजरात इमाम अबू हनीफा रहमतुल्लाह अलैही का कौल है
👉🏻 इब्ने कूदामा रहमतुल्लाह अलैही ने लिखा है इमाम अहमद रहमतुल्लाह अलैही ने फ़रमाया
ھٰذٙا النّٙبِیُّ وٙاٙصْحٙابُہُ وٙالتّٙابِعُوْنٙ وھذا مالک فی اھل الحجار وھذا الثوریُّ فی اھل العراق وھذا الاوزاعی فی اھل الشّٙام وھذااللّٙیثُ فی اھل مصر ماقالوا لرجلِِ صلّٰی وقراء امامُہُ ولم یقراء ھوا صلوتک باطلة .......( المغنی ..ج 2 .ص 262 )
तर्जुमा :- इमाम अहमद रहमतुल्लाह अलैही ने फ़रमाया ये नबी सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम और आप के सहाबा वा तबइन है या अहले हिजाज मे इमाम मालिक
रहमतुल्लाह अलैही है या इराक मे इमाम सूरी रहमतुल्लाह अलैही या अहले शाम मे इमाम अओजई रहमतुल्लाह अलैही या अहले मिश्र मे इमाम लेस रहमतुल्लाह अलैही है इनमे से किसी ने ये फतवा नहीं दिया के जब इमाम किराअत करें और मुक्तादी ना करें तो मुक्तादी की नमाज़ बातिल हो जाती है
👉🏻और इब्ने कूदामा के शागिर्द शरह मुकनी मे लिखते है की
ولاتجب القراءة علی الماموم ھذا قول اکثر اھل العلم وممن کان لایری القراءة خلف الامام علی وابن عباسؓ وابن مسعودؓ وابوسعیدؓ وزید بن ثابتؓ وعقبة بن عامرؓ وجابرؓ وابن عمرؓ وحذیفة بن الیمانؓ وبہ یقول الثوری وابن عینة واصحاب الرای ومالک والزھری ولاسود وابراہیم وسعید بن جبیر قال ابن سیرین لااعلم من السنة القراءة خلف الامام .......( شرح مقنع .ج2 .ص11)
तर्जुमा :- और मुक्तादी पर किराअत वाज़िब नहीं है अक्सर अहले इल्म का कौल यही है और जो अहले इल्म किराअत खलफल इमाम के कइल नहीं थे इनमे हजरत अली रजियल्लाहु अन्हु हजरत इब्ने अब्बास रजियल्लाहु अन्हु हजरत इब्ने मसूद रजियल्लाहु अन्हु हजरत अबू सईद रजियल्लाहु अन्हु हजरत ज़ैद बिन साबित रजियल्लाहु अन्हु हजरत उकबा बिन आमिर रजियल्लाहु अन्हु हजरत जाबिर रजियल्लाहु अन्हु हजरत इब्ने उमर रजियल्लाहु अन्हु हजरत हुज़ैफ़ा बिन यमान
रजियल्लाहु अन्हु है और इसी के कइल सुफियान सूरी रहमतुल्लाह अलैहि सुफियान बिन ऐना रहमतुल्लाह अलैहि असहॉब ए राय और इमाम मालिक रहमतुल्लाह अलैहि इमाम जहरी रहमतुल्लाह अलैहि असवद रहमतुल्लाह अलैहि इब्राहिम रहमतुल्लाह अलैहि और सईद बिन जुबेर रहमतुल्लाह अलैहि है और इब्ने सीरीन रहमतुल्लाह अलैहि ने फ़रमाया के किराअत खलफल इमाम को सुन्नत होने को मे नहीं जानता
👉🏻 कारेइन किराम..ممن کان لایری.. के अल्फाज़ बता रहे है की ये वाज़िब ना कहने वालो की पूरी फेहरिस्त नहीं है बल्कि इनमे से चंद अहम् नाम जिक्र कर दिए गए है निज ये के जिस तरह इमाम अहमद रहमतुल्लाह अलैहि ने फ़रमाया था की किरअत खलफल इमाम के वुजूब का आलमे इस्लाम ने कोई कइल नहीं इसी तरह इब्ने सिरिन रहमतुल्लाह अलैहि के अलफ़ाज़ से वाज़ेह है की किराअत खलफल इमाम का अमल ख़िलाफ़े सुन्नत है....
▫▫▫▫▫▫▫▫▫
[6/4, 8:18 PM] 🌹MUHAMMAD HASNAIN RAZA🌹: ▪▪▪▪▪▪▪▪▪
🌺तर्क किरअत खलफल इमाम
*💎दुआ का तालिब: मुहम्मद मुद्दस्सिर मुख्तार ख़ाँन महिदपुरी*
📲+919617536950
......किस्त चार.... 4
عٙنْ اٙبِیْ ھُرٙیْرٙةٙ رضی اللہ عنہ قٙالٙ قٙالٙ رٙسُوْلُ اللّٰہِ صلی اللہ علیہ وسلم اِنّٙمٙا جُعِلٙ الْاِمٙامُ لِیُئْوتٙمّٙ بِہ فٙاِذٙا کٙبّٙرٙ فٙکٙبِّرُوْا وٙاِذٙا قٙرٙءٙ فٙاٙنْصِتُوْاوٙاِذٙا قٙالٙ غٙیْرِالْمٙغْضُوْبِ عٙلٙیْھِمْ وٙلٙاالضّٙآلِّیْنٙ فٙقُوْلُوْا آمِیْن ....تحقیق السند اسنادہ صحیح علی شرط البخاری ومسلم ....( سنن ابن ماجہ .ص61 باب اذاقرء الامام فانصتوا ..سنن النسائی .ج1 .ص146 باب تاویل قولہ عزوجل واذا قرء القران فاستمعوا لہ وانصتوا)
तर्जुमा... हजरत अबू हुरेरह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है की रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया इमाम सिर्फ इस लिए बनाया गया है की इस की इकतिदा की जाये जब वो (इमाम) तकबीर कहे तो तुम भी कहो जब वह पढ़े तो तुम खामोश रहो और जब इमाम गैरिल मगजूबि अलैहिम वलाज्जालीन कहे तो तुम आमीन कहो
👉🏻एतराज... इस की सनद मे एक रावी मुहम्मद बिन अज़लान है जो के मुदलेस है और ये हजरत अबू हुरेरह रज़ियल्लाहु अन्हु की रिवायत मे ईखतिलात का शिकार हो गया था निज़ एक रावी अबू खालिदुल अहमर وٙاِذا قراء فانصتوا की ज़ियादती मे मुनफ़रिद है लिहाज़ा ये रिवायत जईफ है
🌸जवाब... शक अव्वल (तदलेस ) का जवाब
इमाम मुहम्मद बिन अज़लान अल् मदनी हिजरी 148 सहीह बुखारी मुआलका सहीह मुस्लिम और सुनन अरबा के रावी है सिका इंदलजमहूर फिकीया सदूक और कसीरुल हदीस है (तेहजीबुल इब्ने हजर जिल्द 5 सफा 443, ) इनकी तदलिस सेहत हदीस के मनाफ़ी नहीं चंद वजह से
1⃣वजह अव्वल... इमाम बुखारी रहमतुल्लाह अलैहि और इमाम अबू दाऊद रहमतुल्लाह अलैहि ने इस रिवायत को नक़ल किया और सिर्फ अबू खालिदुल अहमर के तफरीद का तजकिरा तो किया है लेकिन मुहम्मद बिन अज़लान की तदलिस की वजह से हदीस के जईफ होने का जिक्र नहीं किया
قال البخاری .ولا یعرف ھذا ( فانصتوا) من صحیح حدیث ابی خالد الاحمر ...( جزء القراءة للبخاری .ص59 رقم 267)
قال ابو داءود .وھذہ الزیادة .واذا قرء فانصتوا .لیست بمحفوظة الوھم عندنا من ابی خالد ....( سنن ابی داءود .ج1 .ص96 )
अगर मुहम्मद बिन अज़लान की तदलिस सेहत हदीस मनाफ़ी होती तो ये हजरात इसको जरूर जिक्र फरमाते
2⃣वजह सानी.... अल्लामा शम्सुद्दिन अल्जहाँबि रहमतुल्लाह अलैहि हिजरी 748 मे मुहम्मद बिन अज़लान की मुताअद्द मानी रिवायतों की तस्हिह करते है मसलन
1 ....حدثنی ابن عجلان عن القعقاع .....( تعلیقات الذھبی فی التخلیص .ج1 .ص43 )
2 .... ثنا ابن عجلان عن سعید المقبری ....( تعلیقات الذھبی فی التخلیص .ج1 .ص131 .185 )
3 ... عن محمد بن عجلان عن سمی ....( تعلیقات الذھبی فی التخلیص .ج1 .
ص352 )
4 ... عن ابن عجلان عن عیاض بن عبداللہ ...( تعلیقات الذھبی فی تلخیص .ج1 .ص382 )
👉🏻3⃣ शक सानी (ईखतिलात) का जवाब जहा तक ईखतिलात के एतराज का ताल्लुक है तो ये भी चंद वजह से इतिफात नहीं
1⃣वजह अव्वल... इसलिए के अगरचे बाज़ हजरात ने मुहम्मद बिन अज़लान की इन रिवायतों पर कुछ कलाम किया है जो बतरीक सईद अल मकबरी अन अबी हुरेरह रज़ियल्लाहु अन्हु मरवी है और इन रिवायतों की वजह से ही इनके ईखतिलात का कौल किया है....
लेकिन इमाम इब्ने हिब्बान और अल्लामा जहाँबि रहमतुल्लाह अलैहि ने इस के ऊपर जोर तरदीद फ़रमाई है....
बल्कि इमाम इब्ने हिब्बान ने तो तसरीह की है
فھذا مما حمل عنہ قدیما قبل اختلاط صحیفة ...( تہذیب التہذیب .ج5 .ص742 )
के इब्ने अज़लान अन सईद अन अबीया अन अबी हुरेरह वाली रिवायत इस के सहीफा के ईखतिलात से पहले की है
इस तफसील से मालूम हुआ के ईखतिलात सहीफा का एतराज सईद अल् मकबरी के तरीक पर था जिस का जवाब अईम्मा ने दिया है लेकिन हमारे पेश करदा रिवायत तो सईद अल् मकबरी के तरीक से नहीं बल्कि ज़ैद बिन असलम के तरीक से है लिहाज़ा एतराज बातिल है
2⃣ वजह सानी.... इमाम मुहम्मद बिन अज़लान अल्मदनी के मुताबा मौजूद है
1:- जारजा बिन मूसब
وٙقٙدْ رٙوٙاہُ خٙارِجٙةُ بْنُ مُصْعبِِ ایضًا یعنی زیدبن اسلم ....( سنن الکبری للبیہقی .ج2 .ص157 )
2:- यहया बिन अल्अलारजी
وٙقٙدْ رٙوٙاہُ خٙارِجٙةُ بْنُ مُصْعبِِ ایضًا یعنی زیدبن اسلم ....( سنن الکبری للبیہقی .ج2 .ص157 )
3⃣वजह सालस.... इमाम नववि रहमतुल्लाह अलैहि मुखतालत रावी के मुताल्लीक एक कायदा बयान करते है
وحکم المختلط انہ لایحتج بما روی عنہ فی الاختلاط او شک فی وقت تحملہ ویحتج بماروی عنہ قبل الاختلاط وما کان فی الصحیحین عنہ محمول علی الاخذ عنہ قبل الاختلاطہ ....( تہذیب الاسماء واللغات للنوی .ج1 .ص242 )
हमारे पेश करदा रिवायत अबू खालिदूल अहमर अन इब्ने अज़लान के तरीक से है और यही तरीक सहीह मुस्लिम जिल्द 1 सफा 216 पर मौजूद है जो दलील है के इब्ने अज़लान
ने इसको ज़हीफ करार दिया है..
क़ाजी शुकानी.नील्लुअतार.सफा 234 पर लिखते हैं. इब्न ईसहाक़
لیس بحجتہ لاسیمااذا عنعن
तर्जुमा.... मोहम्मद बिन इसहाक़ हुज्जत नहीं खासकर जब उनसे रिवायत करें
✡ ग़ैर मुकल्लिदीन के रहनुमा नवाब सिद्दीक़ हसन खान. दलिल्लु तालीब. सफा 239 पर लिखते हैं मोहम्मद बिन इसहाक़ हुज्जत नईसत... तर्जुमा.... मोहम्मद बिन इसहाक़ हुज्जत नहीं है
लेहाजा जम्हूर के मुकाबले में इमाम बुखारी और सईबा की
तौसिक़ मरजूह है. इसके अलावा इस हदीस में एक रावि मकहुल मुद्दलस रावि है जो अनअना से रिवायत करता है और मुद्दलस का अनअना मुहदसीन के यहां मकबूल नहीं
इब्न शईद रहमुल्लाह भी लिखते हैं के मकहूल ने हज़रत उबादा रज़ि अल्लाहु ताला अन्हू से कोई हदीस नहीं सुनी....(तहजीबुल तहजीब. जिल्द 10. सफा 292 )
और उसके बाद तर्क में नाफेअ मजहुल रावि हैं.
- - - - - - - - - - - - - - - - -
▫▫▫▫▫▫▫▫▫
[6/4, 8:18 PM] 🌹MUHAMMAD HASNAIN RAZA🌹: ▪▪▪▪▪▪▪▪▪
🌺तर्क किरअत खलफल इमाम
*💎दुआ का तालिब: मुहम्मद मुद्दस्सिर मुख्तार ख़ाँन महिदपुरी*
📲+919617536950
....किस्त 3....
عٙنْ اٙبِیْ مُوْسٙی الْاٙشْعٙریِّ رضی اللہ عنہ قٙالٙ اِنِّ رٙسُوْلٙ اللّٰہِ ؐ خٙطٙبٙنٙا فٙبٙیِّنٙ لٙنٙا سُنّٙتٙنٙا وٙ عٙلّٙمٙنٙا صٙلوتٙنٙا فٙقٙالٙ اِذٙا صٙلّٙیْتُمْ فٙاٙقِیْمُوْاصُفُوْفٙکُمْ ثُمّٙ لِیٙئُومّٙکُمْ اٙحٙدُکُمْ فٙاِذٙا کٙبّٙرٙفٙکٙبِّرُوْا ( وفی حدیث جریر عن سلیمان عن قتادہ من الزیّادة ) وٙاِذٙا قٙرٙاءٙ فٙاٙنْصِتُوْا. وٙاِذٙا قٙالٙ غٙیْرِ الْمٙغْضُوْبِ عٙلٙیْھِمْ وٙلٙاالضّٙالِّیْنٙ فٙقُوْلُوْا آمِیْن. .....( صحیح مسلم .ج1 .ص174 )
तर्जुमा :- हजरत अबू मूसा असअरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है की हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें खिताब फ़रमाया पस आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें सुन्नत की तालीम व तलकीन फ़रमाई और नमाज़ पढ़ने का तरीका बयान फ़रमाया पस हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया के जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफे दुरुस्त कर लो फिर तुम मे से एक शख्स तुम्हारा इमाम बने जब वह (इमाम ) तकबीर कहे तो तुम भी तकबीर कहो (इमाम मुस्लिम ने लिखा है के بروایت جریر عن سلیمان عن قتادہ इस हदीस मे ये इज़ाफ़ा है के )
और जब इमाम पढ़े तो तुम खामोश रहो और जब (गाइरिल मग़ज़ूबी अलैहिम वाल्दाऊलिन) कहे तो तुम आमीन कहो
एतराज नम्बर 1⃣ 👉🏻इसकी सनद मे एक रावी सुलेमान अल्तेमी है जो के मदलेस है और मदलेस का अनआना सेहत ए हदीस के मनाफ़ी होता है
🌺 जवाब :- इमाम सुलेमान अल्तेमी हिजरी 143 सहीह बुखारी वा सहीह मुस्लिम के सिका बिलइज़्मा हाफ़िज़ मूतताकिन और साबित रावी है इनकी तदलिस की वजह से इस रिवायत को ना काबिले कुबूल करार देना दुरुस्त नहीं इस लिए के
1⃣ अव्वलन.... उसूले हदीस का कायदा है की साहिएन के मदलेस की तदलिस इंदलमोहद्दिसीन सेहत हदीस के मानाफि नहीं क्यों की वह दूसरे जिहत से सीमअ पर मेहमूल होती है... चुनांचे इमाम नववि रहमतुल्लाह अलैहि फरमाते है
عن المدلسین بعن ونحوھا فمحمول علی ثبوت السماع من جھة اخری ....( مقدمہ شرح صحیح مسلم للنوی .ج1 .ص18 )
और ये रिवायत सहीह मुस्लिम की है लिहाज़ा तदलिस मुजर नहीं
2⃣ सनयन्.... इमाम सुलेमान अल्तेमी ने हद्दासना कतादा के अलफ़ाज़ से सिमअ की तसरीह कर रखी है देखिये
حٙدّٙثٙنا عٙاصِمُ بْنِ النّٙصْرِ حٙدّٙثنا الْمُعْتٙمِرُ قال سمعتُ ابی ( سلیمان التیمی ) حٙدّٙثٙنٙا قٙتٙادٙةُ .....( سنن ابی داءود .ج1 .ص148 باب التشہد )
حدثنا سلیمان بن الاشعث السجستانی قال ثنا عاصم بن النصر قال ثنا المعتمر قال سمعت ابی ( سلیمان التیمی ) قال ثنا قتادہ ( مسند ابی عوانہ .ج1 .ص360 رقم الحدیث 1339 )
हदीस के मनाफ़ी नहीं... (क़वाइद फि उलुमूल हदीस सफा 159)
लिहाज़ा एतराज बातिल है
एतराज नम्बर...2⃣👉🏻इस रिवायत मे.. واذا قرئ القران فاستمعوا की जियादत सुलेमान अल्तेमी के अलावा किसी और से मरवी नहीं लिहाज़ा ये ज़ियादती साज़ है पस ये रिवायत ना काबिले कुबूल है
🌺जवाब..... ये एतराज भी वाजवाह से बातिल है
1⃣ अवल्लन... इमाम सुलेमान अल्तेमी बिलइज़्मा सिका है और واذا قرئ القران فاستمعوا के बयान करने मे ये जमाअत सिकात की मुखालिफत नहीं कर रहे है बल्कि एक जाइद चीज को बयान कर रहे है जो की साज नहीं बल्कि ज़ियादती सिका है और जमहूर मुहद्दिसीन के नज़दीक ज़ियादती सिका मकबूल है
(सहीह बुखारी जिल्द 1 सफा 201)
लिहाज़ा इमाम सुलेमान अल्तेमी का واذا قرئ القران فاستمعوا की ज़ियादती रिवायत करना इन के सिका होने की वजह से मकबूल है पस एतराज बातिल है
2⃣सनयन् ..واذا قرئ القران فاستمعوا की जियादत बयान करने मे इमाम सुलेमान अल्तेमी मुनफ़रिद नहीं बल्कि दीगर रिवायत ने भी इनकी मुताबेअत तामा कर रखी है मसलन
💪🏻इमाम अबू उबेदा अल्हादाद
देखिये
(مسند ابی عوانہ .ج 1 .ص 360 .رقم الحدیث 1341 .بیان اجازة القراءة .الخ)
💪🏻उमर बिन आमिर और सईद बिन अबी अरवबा देखिये
( سنن الدارقطنی .ص 217 .رقم الحدیث 1235 ...سنن الکبری للبیہقی .ج2 .ص155 .باب من قال یترک المامون القراءة .الخ)
लिहाज़ा साज़ होने वाला ये एतराज बातिल है
👉🏻एतराज नम्बर 3⃣ हजरत अबू मूसा असअरी रज़ियल्लाहु अन्हु की इस रिवायत की सनद मे दूसरा रावी कतादा है जो की मुदलेस है और अन से रिवायत कर रहा है
मुदलेस का अन्अना सेहत हदीस के मनाफि होता है
🌺 जवाब ;- इमाम कतादा बिन दअमा हिजरी 117 सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम के सिका बिलइज़्मा रावी है इनकी तदलिस की वजह से इस रिवायत को नाकाबिले कुबूल करार देना दुरुस्त नहीं चंद वजह से
1⃣ अव्वलन... उसूले हदीस का कायदा है की साहिएन मुदलिस की तदलिस इंदलमुहाद्दिसीन सेहत हदीस मनाफ़ी नहीं क्युकी वह दूसरा जिहत से सिमा पर मेहमूल होती है (इमाम नववि रहमतुल्लाह अलैहि का हवाला ऊपर गुज़र चूका है ) और ये रिवायत सहीह मुस्लिम की है लिहाज़ा तदलिस मुजर नहीं
2⃣ सनयन्. इमाम कतादा बिन दआमा ने हदीस अबी मूसा असअरी रज़ियल्लाहु अन्हु मे तहदीसा तसरीह की देखिये...
सुनन अबी दाऊद जिल्द 1 सफा 147 सहीह अबी अवाना जिल्द 1 सफा 360 अल् हदीस 1339
3⃣ सलासन.... इमाम कतादा का सुमार इन मुदलेस मे होता है जिन की तदलिस किसी भी किताब मे सेहत हदीस के मनाफि नहीं इमाम हकीम फरमाते है
فمن المدلسین من دلس عن الثقات الذین ھم فی الثقة مثل المحدث او فوقہ او دونہ الا انھم لم یخرجوا من عدادالذین یقبل اخبارھم فمنھم من التابعین ابو سفیان طلحة بن نافع وقتادة بن دعامة وغیرھما ...( معرفت علوم الحدیث .ص103 )
अल्लामा इब्ने हाजम मुहद्दिसीन का जाब्ता बयान करते हुवे इन मुदलिसिन की फेहरिस्त बयान है जिन की रिवायते बावजूद तदलिस के सहीह है और इनकी तदलेस से सेहत हदीस पर कोई असर नहीं पड़ता चुनांचे लिखते है
منھم کان جلة اصحاب الحدیث وائمة المسلمین کالحسن البصری وابی اسحاق السبیعی وقتادة بن دعامة وعمروبن دینار وسلیمان الاعمش وابی الزبیر وسفیان الثوری وسفیان بن عینة ....( الاحکام لابن حزم .ج2 .ص141 142 فصل من یلزم قبول نقلہ الاخبار)
लिहाज़ा हदीस अबी मूसा असअरी रज़ियल्लाहु अन्हु बिलकुल सहीह और हुज्जत है
👉🏻 फायदा... जुबेर अली जई गैर मुकल्लिद ने इस हदीस को नक़ल करने के बाद लिखा है (सहीह ) नस्रुबारी अज़ जुबेर अली जई सफा 283
▫▫▫▫▫▫▫▫▫
[6/4, 8:18 PM] 🌹MUHAMMAD HASNAIN RAZA🌹: 🌸तर्क किराअत खलफुल इमाम
*💎दुआ का तालिब: मुहम्मद मुद्दस्सिर मुख्तार ख़ाँन महिदपुरी*
📲+919617536950
किस्त.... 1.....
وٙاِذٙا قُرِئٙ الْقُرْاٰنُ فٙاسْتٙمِعُوْا لٙہ وٙاٙنْصِتُوْا لٙعٙلّٙکُمْ تُرْحٙمُوْن......( پ 9 سورہ اعراف آیت نمبر 204 )
तर्जुमा :- और जब क़ुरआन करीम पढ़ा जाये तो इसकी तरफ कान लगाए रहो और खामोश रहो ताके तुम पर (हक़ तआला की ) रेहमते नाज़िल हो
➖➖➖➖➖➖➖➖
जमहूर सल्फ व खलफ् का मूत्ताफिका फैसला है इस आयात करीमा मे हक़ तआला ने मसला किरअत खलफल इमाम को वाजेह व वासगाफ और इश्कार फ़रमाया है और इसके बारे मे साफ और नातिक हुक्म सदीर फ़रमाया है यानी इमाम और मुक्तदी दोनों का काम और वजीफा अलग अलग मुतअय्यन फ़रमाया है के क़ुरआन पढ़ा जाये (इमाम किराअत करें ) तो मुक्तदी का वजीफा सिर्फ और सिर्फ यही है के निहायत तवज्ज़ो के साथ क़ुरआन करीम की तरफ कान लगाए और खामोश रहे इमाम का काम किराअत करना और मुक्तदीयों का वजीफा ख़ामोशी के साथ तवज्जों करना है अब हम मुनासिब समझते है की मज़कुरा आयात करीमा की तफसीर और तसरिह मे सहाबा किराम रजियल्लाहु अन्हु के इरशादात ए आलिया और अकवाल मुबारका पेश कर दे के इस मुकद्दस जमात ने इस आयात करीमा का क्या मतलब समझा है
🌸आयात मुबारका की तफसीर सहाबा किराम रजियाल्लाहु अन्हु से
1⃣ हजरत अब्दुल्लाह बिन मसूद रजियाल्लाहु अन्हु मजकुरा आयात करीमा की शान नुजुल के बारे मे फरमाते है
صٙلّٰی اِبْنِ مٙسْعُوْدِِؓ فٙسٙمٙعٙ انٙا سٙیّٙقْرٙءُونُ مٙعٙ الْامام فٙلٙمّا اِنْصٙرٙفٙ قال اما آنٙ لکُم ان تفھموا ما آن لکم ان تعقلوا ...واذا قرئ القران فاستمعوا لہ وانصتوا لعلکم ترحمون ......( تفسیر ابن جریر .ج9 .ص103 )
तर्जुमा :- हजरत अब्दुल्लाह बिन मसूद रजियल्लाहु अन्हु ने (एक दफा ) नमाज़ पढ़ी और चंद आदमियों को इन्होने इमाम के साथ किरअत करते सुना जब नमाज़ से फ़ारिग हुवे तो फ़रमाया के क्या अभी वक़्त नहीं आया के तुम समझ बुझ से और अक्ल वा खुर्द से काम लो जब क़ुरआन करीम की तिलावत हो रही हो तो इसकी तरफ काम लगाओ और खामोश रहो जैसा की अल्लाह तआला ने तुम्हे हुक्म दिया है
2⃣ हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजियल्लाहु अन्हु मजकुरा आयात करीमा की शान नुजुल के बारे मे फरमाते है
عٙن عبّاسؓ فی قولہ تعالی ....واذا قرئ القراٰن فاستمعوا لہ وانصتوا لعلکم ترحمون ....یعنی فی الصلوة المفروضة ......( تفسیرابن کثیر .ج2 .ص28 ...تفسیر ابن جریر .ج9 .ص103 ...کتاب القراءة .ص88 ....روح المعانی .ج9 .ص150 )
तर्जुमा :- हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजियाल्लाहु अन्हु से रीवायत है की واذا قرئ القراٰن فاستمعوا لہ وانصتوا لعلکم ترحمون का शान नुजुल फर्ज़ नमाज़ है
3⃣ हजरत मिकदाद बिन असवद रजियाल्लाहु अन्हु से मज़कुरा आयात करीम की शान नुजुल के बारे मे
وٙذٙکر الْبٙغْویُّ عٙنِ المِقْدادِ انّٙہ سمع ناسًا یقرءون مع الامام فلمّٙا انصرف قال اما آن لکم ان تفٙقّٙھُوْا ....واذا قرئ القران فاستمعوا لہ وانصتوا ..کما امر کم اللّٰہ ......( تفسیر مظہری .ج3 .ص507 )
तर्जुमा :- इमाम बगवी रहमतुल्लाह अलेही ने हजरत मिकदाद बिन असवद रजियाल्लाहु अन्हु से रीवायत की है के इन्होने कुछ लोगो को इमाम के पीछे पढ़ते हुवे सुना आप ने इन लोगो को (डाटते हुवे ) फ़रमाया के क्या अभी वक़्त नहीं आया के तुम अक़्ल व दानिश से काम लो जब क़ुरआन पढ़ा जाये तो इस की तरफ कान लगाओ और खामोश रहो जैसा की हक़ तआला का इरशाद गिरामी है
आयात मज़कुरा की तबाईन आज़म से
1:- हजरत मुजाहिद रहमतुल्लाह अलिही से आयात मज़कुरा की तफसीर
عن مجاھد فی قولہ ....واذا قرئ القران فاستمعوا لہ وانصتوا...فی الصلوة ......( تفسیر ابن جریر .ج9 .ص103 ...تفسیر ابن کثیر .ج2 .ص281 ...کتاب القراءة .ص90 )
तर्जुमा :- हजरत मुजाहिद रहमतुल्लाह अलिही से रिवायत है की... واذا قرئ القران فاستمعوا का शान नुजुल नमाज़ से है
2⃣ हजरत सईद बिन मूसेब रहमतुल्लाह अलैही का आयात मुज़कुरा के शान नुजुल के बारे मे
عٙنْ سعید بن مسیب ....واذا قرئ القران فاستمعوا لہ وانصتوا .....قال فی الصلوة ......( تفسیر ابن جریر .ج9 .ص103 ...کتاب القراءة .ص91 )
तर्जुमा :- हजरत सईद बिन मूसेब रहमतुल्लाह अलैही फरमाते है की واذا قرئ القران فاستمعوا... का शान नुजुल नमाज़ है
3⃣ हजरत सईद बिन जुबेर रहमतुल्लाह अलैही का मज़कुरा आयात का शान नुजूल के बारे मे
عٙنْ سعید بن جبیر ...واذا قرئ القران فاستمعوا لہ وانصتوا فی ....الصلوة المکتوبة ......( تفسیر ابن جریر .ج9 .ص103 ....تفسیر ابن کثیر .ج2 .ص281 )
तर्जुमा :- हजरत सईद बिन जुबेर ताबई फरमाते है की
واذا قرئ القران فاستمعوا
फर्ज़ नमाज़ के बारे मे नाज़िल हुई है
4⃣ हजरत हसन बसरी तबई रहमतुल्लाह अलैही का मज़कुरा आयात करीमा के शान नुजूल के बारे मे
عٙن الحسن فاستمعوا لہ وانصتوا قال فی الصلوة ...
.( کتاب القراءة .ص91 )
तर्जुमा :- हजरत हसन बसरी तबई रहमतुल्लाह अलैही फरमाते है की ये आयात नमाज़ के बारे मे नाजिल हुई है
5⃣ हजरत अब्दुल्लाह बिन उमेर रहमतुल्लाह अलैही और अता बिन अबी रबहा रहमतुल्लाह अलैही से मज़कुरा आयात की शान नुजूल के बारे मे
قال عبید بن عمیر وعطاء بن ابی رباح انما ذلک فی الصلوة ...واذا قرئ القران فاستمعوا لہ وانصتوا ......( تفسیر ابن جریر .ج9 .ص103 )
तर्जुमा :- हजरत अब्दुल्लाह बिन उमेर रहमतुल्लाह अलैही और अता बिन अबी रबहा रहमतुल्लाह अलैही फरमाते है की की واذا قرئ القران فاستمعوا لہ وانصتوا का शान नुजूल नमाज़ है
6⃣ हजरत इसहाक इब्राहिम नखाई और अब्दुल रेहमान बिन ज़ैद बिन असलम रहमतुल्लाह अलैही से मज़कुरा आयात की शान नुजूल के बारे मे
قال الضحاک وابرہیم النخعی وقتادہ والشعبی والسدی وعبدالرحمن بن زید بن اسلم ان المراد بذلک فی الصلوة .....( تفسیر ابن کثیر .ج2 .ص281 )
तर्जुमा :- हजरत इसहाक हजरत इब्राहिम नखाई हजरत कतादा हजरत शाईबि हजरत सदी हजरत अब्दुल रेहमान बिन ज़ैद बिन असलम रहमतुल्लाह अलैही फरमाते है की ये आयात नमाज़ के बारे मे नाज़िल हुई है
7⃣ हजरत इमाम अहमद बिन हम्बल रहमतुल्लाह अलैही का कौल मज़कुरा आयात के बारे मे शैखुल इस्लाम इमाम इब्ने तेमीया रहमतुल्लाह अलैही नक़ल करते हुवे फरमाते है
وذکر ابن حنبل الاجماع علی انھا نزلت فی الصلوة وذکر الاجماع علی انھا لا تجب القراءة وذکر الاجماع علی الماموم حال الجھر .....( فتاوی ابن تیمیہ .ج 2 .ص168 )
तर्जुमा :- हजरत इमाम अहमद बिन हम्बल रहमतुल्लाह अलैही ने इस पर इज़मा नक़ल किया है इस आयात का शान नुजूल नमाज़ है नीज़ इस पर भी उलमा का इत्तेफ़ाक़ नक़ल किया है की जब इमाम जहरी से किराअत कर रहा हो तो मुक्तादी पर किरात वाज़िब नहीं
👉🏻 एक दूसरे मुकाम पर शैखुल इस्लाम इमाम इब्ने तेमीया रहमतुल्लाह तेहरीर फरमाते है
जमहुर का कौल सहीह और दुरुस्त है की जब क़ुरआन करीम पढ़ा जाये तो तुम इस की तरफ तवज्जो करो और खामोश रहो ताके तुम पर हक़ तआला रेहमतो की बारिश नाज़िल हो इमाम अहमद बिन हम्बल रहमतुल्लाह अलैही फरमाते है की सब लोगो का इस पर इत्तेफ़ाक़ है की इस आयात करीमा का शान नुजूल नमाज़ है..
(फतावा कबरी जिल्द 2 सफा 168 )
मज़कुरा हजरात के अलावा दूसरे जलीलुल कद्र मुफ्सीरीन मसलन साहीबे तफसीर
कसाफ जिल्द 1 सफा 523 मे अल्लामा बेजावी सफा 308 मे साहिबे मुअल्लम अल् तंज़ील सफा 272 मे और अबू अल्सऊद जिल्द 4 सफा 507 मे और साहिबे रूहलमानी जिल्द 9 सफा 151 मे यही जेबकर्तास फरमा रहे है की इस आयात करीमा का शान नुजूल नमाज़ है
▫▫▫▫▫▫▫▫▫
[6/4, 8:18 PM] 🌹MUHAMMAD HASNAIN RAZA🌹: ▪▪▪▪▪▪▪▪▪
🌺तर्क किरअत खालफल इमाम
*💎दुआ का तालिब: मुहम्मद मुद्दस्सिर मुख्तार ख़ाँन महिदपुरी*
📲+919617536950
.....किस्त 5....
👉🏻 हदीस शरीफ.....
عن جابر بن عبداللہ قال قال النبی صلی اللہ علیہ وسلم من کان لہ امام فقراءة الا مام لہ قراءة ......( ابن ماجہ شریف .ص61 )
तर्जुमा :- हजरत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया के जो शख्स इमाम की इकतिदा मे नमाज़ पढ़ रहा हो तो इसके लिए इमाम की किरअत ही काफी है
🌸 यानी जो शख्स इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहा हो इसको अलग पढ़ने और अलेहदा किरअत करने की जरुरत नहीं बल्कि इमाम की किरअत मुक्तादी की किरअत इमाम का पढ़ना मुक्तादी का पढ़ना है इस हदीस शरीफ मे जेहरी और सिर्री की कोई कैद नहीं लिहाज़ा ये अपने उमुम पर होने की वजह से हर नमाज़ को शामिल है...
👉🏻 हदीस शरीफ...
عن انسؓ قال صلی بنا رٙسُوْلُ اللّٰہ صلی اللہ علیہ وسلم ثُمّٙ اٙقْبٙلٙ عٙلٙیْنٙا بِوٙجْھِہ فٙقٙالٙ اٙتٙقْرٙءُوْنٙ وٙالاِمٙامُ یٙقْرٙءُ فٙسٙتکٙتُوْا فٙسٙاٙلٙھُمْ ثٙلٰثًا فٙقٙالُوا اِنّٙا نٙفْعٙلُ قٙالٙ فٙلٙا تٙفْعٙلُوْا ...( طحاوی شریف .ص107 )
हजरत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है की हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक नमाज़ पढ़ कर हमारे तरफ मुतावज्जा हुवे और दरयाफ्त फ़रमाया के क्या तुम इमाम के पढ़ते वक़्त (इमाम की इकतिदा मे) पढ़ते हो सहाबा इकराम रज़ियल्लाहु अन्हु खामोश रहे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीन दफा दरयाफ्त फ़रमाया तब सहाबा इकराम रज़ियल्लाहु अन्हु ने अर्ज किया जी हा हजरत हम इमाम के पीछे किरअत करते है इस पर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया आइंदा ऐसा मत करना
▫▫▫▫▫▫▫▫▫
Comments
Post a Comment